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एक्टिवेटेड चारकोल को त्वचा के लिए वरदान माना जाता है। इसके प्रयोग से त्वचा की सारी अशुद्धियां और टॉक्सिन्स निकल जाते हैं और त्वचा प्राकृतिक रूप से चमकदार और खूबसूरत बनती है। चारकोल के साथ कुछ दूसरी प्राकृतिक चीजों को मिलाने से ये और ज्यादा फायदेमंद हो जाता है।

एक्टिवेटेड चारकोल 

कैसे बनता है एक्टिवेटेड चारकोल 

चारकोल का शुद्ध रूप कोयला है। इसे लकड़ी को जलाकर बनाया जाता है। इसे बनाने के लिए लकड़ी को 800 से 1200 डिग्री सेल्सियस तापमाना पर बहुत कम ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलाया जाता है। इस तरह लकड़ी को जलाने से उसमें से मीथेन, हाइड्रोजन और टार निकल जाते हैं, जिससे इसका वजन 75 प्रतिशत तक कम हो जाता है। इसके बाद जो पदार्थ बचता है वही है चारकोल। चारकोल यानी कोयले का प्रयोग आमतौर पर ऊर्जा पैदा करने के लिए किया जाता है।
ये चारकोल त्वचा के लिए तब फायदेमंद होता है जब इसे एक्टिवेट किया जाता है। चारकोल को एक्टिवेट करने के लिए इसे ज्यादा तापमान में स्टीम किया जाता है और इसमें से अकार्बनिक पदार्थों को बाहर निकाल दिया जाता है। इस प्रक्रिया में चारकोल में छोटे-छोटे छेद हो जाते हैं। इस एक्टिवेट चारकोल का प्रयोग त्वचा की तमाम समस्याओं में किया जाता है।

एक्टिवेटेड चारकोल का प्रयोग सौंदर्य के लिए

एक्टिवेटेड चारकोल त्वचा की गहराई में मौजूद गंदगी और टॉक्सिन्स को बाहर निकालता है। कुछ अन्य प्राकृतिक चीजों जैसे शहद, ऑलिव ऑयल आदि के साथ मिलाकर प्रयोग करने से त्वचा की सफाई के साथ-साथ ये त्वचा को पोषण भी प्रदान करता है। पार्लर में आमतौर पर बंबू चारकोल का प्रयोग किया जाता है। त्वचा को बेहतर और ग्लोइंग बनाने के लिए आप चारकोल के साथ ऑर्गेनिक शहद, नारियल का तेल, ऑलिव ऑयल, शिया बटर आदि इस्तेमाल कर सकते हैं।

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त्वचा की बीमारियों में चारकोल

त्वचा की खूबसूरती बढ़ाने के अलावा चारकोल का प्रयोग त्वचा संबंधी रोगों में भी किया जा सकता है। एक्जीमा और सोरायसिस जैसे त्वचा रोगों में एक्टिवेटेड चारकोल बहुत फायदेमंद होता है। इसके प्रयोग के लिए एक बार अपने डॉक्टर से जरूर पूछ लें।

दांतों के लिए एक्टिवेटेड चारकोल

टूथपेस्ट के साथ थोड़ा एक्टिवेटेड चारकोल पाउडर मिलाने से ये दांतों की सफेदी और चमक बढ़ाता है। चाय, कॉफी, पान आदि से गंदे हुए दांतों को साफ करने के लिए चारकोल का प्रयोग किया जा सकता है। ध्यान दें कि पहले चारकोल को टूथपेस्ट में मिला लें फिर ब्रश पर लगाकर ही दांतों पर इसका प्रयोग करें। आप सप्ताह में दो बार चारकोल के प्रयोग से दांतों की सफेदी में अंतर देख सकते हैं।

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चारकोल के प्रयोग में सावधानी

चारकोल पाउडर अगर आपके फेफड़ों में चला जाए, तो खतरनाक हो सकता है इसलिए इसके प्रयोग में हमेशा सावधानी बरतें। नाक के पास या मुंह के पास लाकर चारकोल पाउडर का प्रयोग न करें।